श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.224.17 
पृथिवी ज्योतिराकाशमापो वायुश्च पञ्चम:।
एतद्योनीनि भूतानि तत्र का परिदेवना॥ १७॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश- ये ही सब प्राणियों के शरीरों के कारण हैं; फिर इनके लिए शोक और विलाप करने की क्या आवश्यकता है?॥17॥
 
Earth, water, fire, air and sky—these are the causes of the bodies of all beings; so what is the need for mourning and lamentation for them?॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)