Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.16: सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और संहार कौन करता है? यह सब जीवों के कर्मों से ही होता है और इसका प्रयोजन भी कोई और (परमेश्वर) ही है॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
को हि लोकस्य कुरुते विनाशप्रभवावुभौ।
कृतं हि तत् कृतेनैव कर्ता तस्यापि चापर:॥ १६॥
अनुवाद
सम्पूर्ण जगत् की उत्पत्ति और संहार कौन करता है? यह सब जीवों के कर्मों से ही होता है और इसका प्रयोजन भी कोई और (परमेश्वर) ही है॥16॥
Who does the creation and destruction of the entire universe? It is all done by the actions of the living beings and its purpose is also someone else (God).॥ 16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥