हे माघवान! जो कोई किसी को मारकर या परास्त करके अपने पराक्रम का अभिमान करता है, वह वास्तव में उस पुरुषार्थ का कर्ता नहीं है; क्योंकि जगत् का रचयिता परमात्मा ही उस कर्म का भी कर्ता है। ॥15॥
O Maghavan! Whoever takes pride in his bravery by killing or defeating someone is not actually the doer of that effort; because the creator of the world, the Supreme Soul, is the doer of that action as well. ॥15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥