Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.224.14: जो मनुष्य किसी को मारता है, वह स्वयं मरा हुआ ही मरे हुए को मारता है। मारने वाला और मारा जाने वाला, दोनों ही आत्मा को नहीं जानते (क्योंकि आत्मा न तो कर्म है और न ही मारने वाले का)।॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हतं हन्ति हतो ह्येव यो नरो हन्ति कञ्चन।
उभौ तौ न विजानीतो यश्च हन्ति हतश्च य:॥ १४॥
अनुवाद
जो मनुष्य किसी को मारता है, वह स्वयं मरा हुआ ही मरे हुए को मारता है। मारने वाला और मारा जाने वाला, दोनों ही आत्मा को नहीं जानते (क्योंकि आत्मा न तो कर्म है और न ही मारने वाले का)।॥14॥
The person who kills someone, actually kills a dead person while being dead himself. The one who kills and the one who is killed, both do not know the soul (because the soul is neither the action nor the doer of the act of killing).॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥