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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना
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श्लोक 13
श्लोक
12.224.13
अर्थसिद्धिमनर्थं च जीवितं मरणं तथा।
सुखदु:खफले चैव न द्वेष्मि न च कामये॥ १३॥
अनुवाद
मैं न तो धन-लाभ, जीवन या सुख-फल की इच्छा रखता हूँ और न ही मुझे बुराई, मृत्यु और दुःख-फल से कोई द्वेष है ॥13॥
I neither wish for financial gain, life or happy results nor do I have any hatred for evil, death and sad results. 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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