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mahabharat 12.224.11: जो मनुष्य सद्बुद्धि प्राप्त कर लेता है, वह उस बुद्धि के द्वारा समस्त पापों का नाश कर देता है। पापरहित होकर वह सत्त्वगुण को प्राप्त होता है और सत्त्वगुण में स्थित होकर वह सात्विक सुख को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 12.224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 224: बलि और इन्द्रका संवाद, बलिके द्वारा कालकी प्रबलताका प्रतिपादन करते हुए इन्द्रको फटकारना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.224.11 
बुद्धिलाभात् तु पुरुष: सर्वं तुदति किल्बिषम्।
विपाप्मा लभते सत्त्वं सत्त्वस्थ: सम्प्रसीदति॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य सद्बुद्धि प्राप्त कर लेता है, वह उस बुद्धि के द्वारा समस्त पापों का नाश कर देता है। पापरहित होकर वह सत्त्वगुण को प्राप्त होता है और सत्त्वगुण में स्थित होकर वह सात्विक सुख को प्राप्त करता है।
 
The person who gets good wisdom, destroys all sins through that wisdom. Being sinless, he gets Sattva Guna and being situated in Sattva Guna, he gets Sattvik happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)