श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 223: इन्द्र और बलिका संवाद—इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका बलिके द्वारा कठोर प्रत्युत्तर  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  12.223.6-7 
स एव ह्यस्तमयते स स्म विद्योतते दिश:॥ ६॥
स वर्षति स्म वर्षाणि यथाकालमतन्द्रित:।
तं बलिं नाधिगच्छामि ब्रह्मन्नाचक्ष्व मे बलिम्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वे ही अपना आलस्य त्यागकर समय आने पर सम्पूर्ण दिशाओं में प्रकाश करेंगे, अस्त होंगे और वृष्टि करेंगे। हे ब्रह्मन्! मैं उन बलि को खोजने पर भी नहीं पा रहा हूँ। कृपया मुझे राजा बलि का पता बताइए॥6-7॥
 
'He alone, leaving his laziness, would shine in all directions in due course, he alone would set and he alone would bring rain. O Brahman! I am not able to find that Bali even after searching. Please tell me the address of King Bali.॥ 6-7॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd