Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.d38: भौंरा पहले रस इकट्ठा करता है और फिर फूल के चारों ओर चक्कर लगाना शुरू कर देता है। इसी प्रकार जो बुद्धिमान व्यक्ति आत्म-चेतन होकर सभी विषयों को लोक-कल्याण के लिए अनुभव करता है, वह न तो आसक्त होता है और न ही दुर्बल होता है। | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संचितं संचितं पूर्वं भ्रमरो वर्तते भ्रमन्।
योऽभिमानीव जानाति न मुह्यति न हीयते॥
अनुवाद
भौंरा पहले रस इकट्ठा करता है और फिर फूल के चारों ओर चक्कर लगाना शुरू कर देता है। इसी प्रकार जो बुद्धिमान व्यक्ति आत्म-चेतन होकर सभी विषयों को लोक-कल्याण के लिए अनुभव करता है, वह न तो आसक्त होता है और न ही दुर्बल होता है।
The bumble bee first collects the nectar and then starts circling around the flower. Similarly, a wise man who becomes self-conscious and experiences all objects for the welfare of the people, neither gets attached nor is he weakened.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥