Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.d32: जैसे वायु एक होते हुए भी अनेक रूपों में विचरण करती है। वही वायु जब पक्षियों, मृगों, व्याघ्रों, मनुष्यों और बांसुरी में स्थित होती है, तो भिन्न-भिन्न रूप धारण कर लेती है। आत्मा और परमात्मा एक ही हैं; किन्तु वह जीवात्मा से भिन्न प्रतीत होती है। | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे वायु एक होते हुए भी अनेक रूपों में विचरण करती है। वही वायु जब पक्षियों, मृगों, व्याघ्रों, मनुष्यों और बांसुरी में स्थित होती है, तो भिन्न-भिन्न रूप धारण कर लेती है। आत्मा और परमात्मा एक ही हैं; किन्तु वह जीवात्मा से भिन्न प्रतीत होती है।
Just as air, even though it is one, moves in many forms. The same air, when situated in birds, deer, tigers, humans and flutes, acquires different forms. The soul is the same as the Supreme Soul; but it appears to be different from the living soul.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥