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mahabharat 12.222.d31: वह परम सत्ता सभी युगों में विद्यमान है। वह भौतिक जगत से बिल्कुल भिन्न रूप में विद्यमान है। उस परम सत्ता से भिन्न किसी भी भौतिक वस्तु का कोई आध्यात्मिक अस्तित्व नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d31
 
 
श्लोक  12.222.d31 
स युगतो व्यापी। स पृथक् स्थित:। तदपरमार्थम्।
 
 
अनुवाद
वह परम सत्ता सभी युगों में विद्यमान है। वह भौतिक जगत से बिल्कुल भिन्न रूप में विद्यमान है। उस परम सत्ता से भिन्न किसी भी भौतिक वस्तु का कोई आध्यात्मिक अस्तित्व नहीं है।
 
That Supreme Being is present in all ages. He exists in a completely different form from the material world. Any material thing that is different from that Supreme Being has no spiritual existence.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)