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mahabharat 12.222.d23-d24: राजेन्द्र! एक वर्ष पूर्ण होने पर जब महामुनि सनत्कुमार अपनी स्वाभाविक अवस्था में आये, तब ब्राह्मण उन्हें प्रणाम करके खड़े हो गये। ज्ञान से जिनके समस्त पाप धुल गये थे, भगवान सनत्कुमार ने वहाँ आये हुए ऋषियों से कहा - 'मुनियों! मैं जानता हूँ कि उस अदृश्य देवता ने क्या कहा है; अतः आज मुझे तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देना है। मुनियो! अपनी इच्छानुसार प्रश्न पूछो।'   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक d23-d24
 
 
श्लोक  12.222.d23-d24 
तत: संवत्सरे पूर्णे प्रकृतिस्थं महामुनिम्।
सनत्कुमारं राजेन्द्र प्रणिपत्य द्विजा: स्थिता:॥
आगतान् भगवानाह ज्ञाननिर्धूतकल्मष:।
ज्ञातं मया मुनिगणा वाक्यं तदशरीरिण:॥
कार्यमद्य यथाकामं पृच्छध्वं मुनिपुङ्गवा:।
 
 
अनुवाद
राजेन्द्र! एक वर्ष पूर्ण होने पर जब महामुनि सनत्कुमार अपनी स्वाभाविक अवस्था में आये, तब ब्राह्मण उन्हें प्रणाम करके खड़े हो गये। ज्ञान से जिनके समस्त पाप धुल गये थे, भगवान सनत्कुमार ने वहाँ आये हुए ऋषियों से कहा - 'मुनियों! मैं जानता हूँ कि उस अदृश्य देवता ने क्या कहा है; अतः आज मुझे तुम्हारे प्रश्नों का उत्तर देना है। मुनियो! अपनी इच्छानुसार प्रश्न पूछो।'
 
Rajendra! After completion of one year, when Mahamuni Sanatkumara returned to his natural state, the Brahmins bowed to him and stood up. Lord Sanatkumara, whose all sins were washed away by knowledge, said to the sages who had come there - 'Munis! I know what the invisible god has said; therefore, today I have to answer your questions. Munis! Ask questions as per your wish.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)