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तमाह कश्चिद् द्विजवर्यसत्तमो
विभाण्डको मण्डितवेदराशि:।
कस्त्वं भवानर्थविभेदमध्ये
न दृश्यसे वाक्यमुदीरयंश्च॥
अनुवाद
उस समय वेदों के ज्ञान से विभूषित विभाण्डक नामक ब्राह्मण ने उस अदृश्य देवता से पूछा - 'सत्य के विषय में हम लोगों में मतभेद हो गया है; ऐसी स्थिति में आप कौन हैं, जो बोलते हुए भी दिखाई नहीं दे रहे हैं?'
At that time, a Brahmin named Vibhandak, adorned with the knowledge of Vedas, asked that invisible deity - 'There has been a difference of opinion among us regarding the truth; in such a situation, who are you, who are talking but are not visible?'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥