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mahabharat 12.222.35: इन गुणों को अपनाने से ज्ञान स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है, शांति स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है और जो कुछ भी तुम देख रहे हो, वह सब कुछ स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  12.222.35 
स्वभावाल्लभते प्रज्ञां शान्तिमेति स्वभावत:।
स्वभावादेव तत्सर्वं यत्किंचिदनुपश्यसि॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
इन गुणों को अपनाने से ज्ञान स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है, शांति स्वाभाविक रूप से प्राप्त होती है और जो कुछ भी तुम देख रहे हो, वह सब कुछ स्वाभाविक रूप से प्राप्त होता है ॥35॥
 
By adopting these qualities, knowledge is naturally attained, peace is naturally attained and whatever you are seeing, everything is naturally attained. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)