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mahabharat 12.222.22: जब अच्छे-बुरे सब प्रकार के गुण प्रकृति की प्रेरणा से ही प्राप्त होते हैं, तब फिर किसी को उन पर गर्व करने का क्या कारण है? ॥22॥   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.222.22 
स्वभावप्रेरिता: सर्वे निविशन्ते गुणा यदा।
शुभाशुभास्तदा तत्र कस्य किं मानकारणम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
जब अच्छे-बुरे सब प्रकार के गुण प्रकृति की प्रेरणा से ही प्राप्त होते हैं, तब फिर किसी को उन पर गर्व करने का क्या कारण है? ॥22॥
 
When all kinds of qualities, good and bad, are obtained by the inspiration of nature itself, then what is the reason for anyone to be proud of them? ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)