Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.19: परन्तु देखा जाता है कि जो लोग अभीष्ट प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, उन्हें भी बुरी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं और वे अभीष्ट प्राप्ति से वंचित रह जाते हैं; अतः प्रयत्न का महत्व कहाँ है?॥19॥ | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अनिष्टस्य हि निर्वृत्तिरनिर्वृत्ति: प्रियस्य च।
लक्ष्यते यतमानानां पुरुषार्थस्तत: कुत:॥ १९॥
अनुवाद
परन्तु देखा जाता है कि जो लोग अभीष्ट प्राप्ति के लिए प्रयत्न करते हैं, उन्हें भी बुरी वस्तुएँ प्राप्त होती हैं और वे अभीष्ट प्राप्ति से वंचित रह जाते हैं; अतः प्रयत्न का महत्व कहाँ है?॥19॥
However, it is seen that those who make efforts to achieve their desired goals also get bad things and are deprived of achieving their desired goals; hence, where is the importance of effort?॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥