Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.222.17: जो मनुष्य आत्मा को ही अच्छे या बुरे कर्मों का कर्ता मानता है, उसकी बुद्धि दोषयुक्त और सम्यक् ज्ञान से रहित है - ऐसा मेरा मत है ॥17॥ | mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो मनुष्य आत्मा को ही अच्छे या बुरे कर्मों का कर्ता मानता है, उसकी बुद्धि दोषयुक्त और सम्यक् ज्ञान से रहित है - ऐसा मेरा मत है ॥17॥
He who believes the soul to be the doer of good or bad deeds, his intellect is flawed and devoid of the right kind of knowledge - this is my belief. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥