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mahabharat 12.222.13: इन्द्र के इस प्रकार पूछने पर भगवान् के तत्त्व को निश्चित रूप से जानने वाले बुद्धिमान प्रह्लादजी ने अपने ज्ञान का वर्णन करते हुए मधुर वाणी में कहा॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 222: सनत्कुमारजीका ऋषियोंको भगवत्स्वरूपका उपदेश देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.222.13 
इति संचोदितस्तेन धीरो निश्चितनिश्चय:।
उवाच श्लक्ष्णया वाचा स्वां प्रज्ञामनुवर्णयन्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र के इस प्रकार पूछने पर भगवान् के तत्त्व को निश्चित रूप से जानने वाले बुद्धिमान प्रह्लादजी ने अपने ज्ञान का वर्णन करते हुए मधुर वाणी में कहा॥13॥
 
When Indra asked in this way, the wise Prahladji, who definitely knew the essence of God, said in a sweet voice while describing his knowledge. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)