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mahabharat 12.22.5: हे भारतश्रेष्ठ! क्षत्रियों का धर्म बड़ा भयंकर है। उसमें सदैव शस्त्रों का प्रयोग होता रहता है और समय आने पर युद्ध में शस्त्रों से ही मारे भी जाते हैं (अतः उनके लिए शोक करने का कोई कारण नहीं है)।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 12.22: क्षत्रियधर्मकी प्रशंसा करते हुए अर्जुनका पुन: राजा युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 22: क्षत्रियधर्मकी प्रशंसा करते हुए अर्जुनका पुन: राजा युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.22.5 
क्षात्रधर्मो महारौद्र: शस्त्रनित्य इति स्मृत:।
वधश्च भरतश्रेष्ठ काले शस्त्रेण संयुगे॥ ५॥
 
 
अनुवाद
हे भारतश्रेष्ठ! क्षत्रियों का धर्म बड़ा भयंकर है। उसमें सदैव शस्त्रों का प्रयोग होता रहता है और समय आने पर युद्ध में शस्त्रों से ही मारे भी जाते हैं (अतः उनके लिए शोक करने का कोई कारण नहीं है)।॥5॥
 
‘Bhaarat's best! The religion of the Kshatriyas is very dreadful. In it, weapons are always used and when the time comes, they are also killed by weapons in the war (so there is no reason to mourn for them).॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)