श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.219.9 
ज्ञानमूष्मा च वायुश्च त्रिविध: कार्यसंग्रह:।
इन्द्रियाणीन्द्रियार्थाश्च स्वभावश्चेतना मन:।
प्राणापानौ विकारश्च धातवश्चात्र नि:सृता:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
शरीर में ज्ञान (बुद्धि), ताप (जठरांत्र) और वायु (प्राण) - इनका समुदाय ही समस्त कर्मों का संग्रहकर्ता है; क्योंकि इन्हीं से इन्द्रियाँ, इन्द्रियों के विषय, प्रकृति, चेतना, मन, प्राण, अपान, विकार और धातुएँ प्रकट हुई हैं ॥9॥
 
Knowledge (intellect), heat (gastrointestinal tract) and air (prana) in the body – their community is the collector of all the deeds; Because from these the senses, objects of the senses, nature, consciousness, mind, life, apana, vikar and dhatu have appeared. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)