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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान
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श्लोक 7
श्लोक
12.219.7
धातव: पञ्च भूतेषु खं वायुर्ज्योतिषो धरा।
ते स्वभावेन तिष्ठन्ति वियुज्यन्ते स्वभावत:॥ ७॥
अनुवाद
आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी ये पाँच धातुएँ प्राणियों के शरीर में विद्यमान रहती हैं। ये स्वभावतः ही एक दूसरे से मिलती और अलग होती रहती हैं। 7॥
Sky, air, fire, water and earth are the five metals in the body of living beings. They come together and separate by nature. 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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