इमां च यो वेद विमोक्षबुद्धि-
मात्मानमन्विच्छति चाप्रमत्त:।
न लिप्यते कर्मफलैरनिष्टै:
पत्रं बिसस्येव जलेन सिक्तम्॥ ४४॥
अनुवाद
जो इस मोक्षविद्या को जानता है और आत्मा का ध्यानपूर्वक अध्ययन करता है, वह जल में कमल के पत्ते के समान अपने कर्मों के बुरे परिणामों से कभी प्रभावित नहीं होता ॥ 44॥
He who knows this science of salvation and carefully studies the Self is never affected by the evil results of his actions, like a lotus leaf in water. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥