श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.219.41 
एवं सति क उच्छेद: शाश्वतो वा कथं भवेत्।
स्वभावाद् वर्तमानेषु सर्वभूतेषु हेतुत:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्थिति में आत्मा का नाश कैसे हो सकता है? अथवा वह प्रकृति के अनुसार कार्य करने वाले पंचमहाभूतों के साथ नित्य संपर्क में कैसे रह सकता है? 41॥
 
How can the soul be destroyed in such a situation? Or how can he remain in eternal contact with the five great elements which are purposefully acting according to nature? 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)