श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.219.4 
असंसर्गो हि भूतेषु संसर्गो वा विनाशिषु।
कस्मै क्रियेत कल्प्येत निश्चय: कोऽत्र तत्त्वत:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
मृत्यु के बाद आत्मा का पंचमहाभूतों से कोई संबंध रहता है या नहीं? यदि है तो क्यों है? इस विषय में यथार्थतः क्या निर्णय हो सकता है? 4॥
 
After death, does the soul have any connection with the five perishable elements or not? If it exists then why does it exist? What can be decided realistically in this matter? 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)