श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  12.219.39 
एवमेष प्रसंख्यात: स्वकर्मप्रत्ययो गुण:।
कथञ्चिद् वर्तते सम्यक् केषांचिद् वा निवर्तते॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार कर्मानुसार गुणों की प्राप्ति की बात कही गई है। अज्ञानी के ये गुण ज्ञानी में भलीभाँति विकसित होकर निवृत्त हो जाते हैं। 39॥
 
In this way it has been said about attainment of qualities according to one's karma. These qualities of the ignorant develop properly and are retired in the wise. 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)