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श्री महाभारत
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श्लोक 31
श्लोक
12.219.31
अथ यन्मोहसंयुक्तं काये मनसि वा भवेत्।
अप्रतर्क्यमविज्ञेयं तमस्तदुपधारयेत्॥ ३१॥
अनुवाद
शरीर या मन में जो अविवेकी, अज्ञेय और आसक्तियुक्त भाव उत्पन्न होते हैं, उन्हें तमोगुण के कारण ही समझना चाहिए ॥31॥
The irrational, unknowable and attachment-combined feelings that arise in the body or mind should be considered to be caused by Tamoguna. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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