श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  12.219.3 
सर्वमुच्छेदनिष्ठं स्यात् पश्य चैतद् द्विजोत्तम।
अप्रमत्त: प्रमत्तो वा किं विशेषं करिष्यति॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! देखो, मनुष्य की मृत्यु होने पर उसके समस्त साधन नष्ट हो जाते हैं; फिर चाहे वह सावधान रहे या असावधान, उसे क्या विशेष लाभ हो सकता है?॥3॥
 
O best of Brahmins! See, with the death of a man all his resources are destroyed; then whether he is cautious or careless, what special benefit can he derive?॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)