श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.219.24 
एवं पञ्चत्रिका ह्येते गुणास्तदुपलब्धये।
येनायं त्रिविधो भाव: पर्यायात् समुपस्थित:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार तीन-तीन के ये पाँच समुदाय हैं, ये सब गुण कहलाते हैं। इनसे शब्द आदि विषय प्राप्त होते हैं, जिससे कर्ता, कर्म और वस्तु ये त्रिविध भाव क्रमशः विद्यमान रहते हैं। 24॥
 
In this way, these are five communities of three each, all these are called qualities. From these, subjects like words etc. are received, due to which these threefold expressions of subject, action and object are present one by one. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)