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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान
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श्लोक 19
श्लोक
12.219.19
तस्य मार्गोऽयमद्वैध: सर्वत्यागस्य दर्शित:।
विप्रहाणाय दु:खस्य दुर्गतिस्त्वन्यथा भवेत्॥ १९॥
अनुवाद
यह पूर्ण त्याग का मार्ग ही दुःखों से मुक्ति का एकमात्र उपाय है। जो इसके विपरीत आचरण करते हैं, उन्हें दुःख भोगना पड़ता है ॥19॥
This path of total renunciation is the only way to get rid of sorrows. Those who behave contrary to this have to suffer misery. ॥19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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