श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 219: पंचशिखके द्वारा मोक्षतत्त्वका विवेचन एवं भगवान् विष्णुद्वारा मिथिलानरेश जनकवंशी जनदेवकी परीक्षा और उनके लिये वरप्रदान  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  12.219.11 
तत्र विज्ञानसंयुक्ता त्रिविधा चेतना ध्रुवा।
सुखदु:खेति यामाहुरदु:खामसुखेति च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
ज्ञानोन्मुख चेतना (वस्तुओं की उपयोगिता, असारता और तुच्छता के कारण) निश्चय ही तीन प्रकार की होती है। उसे अदुःख, अदुःख और सुख-दुःख कहते हैं। ॥11॥
 
Consciousness oriented towards knowledge (due to the usefulness, worthlessness and insignificance of objects) is certainly of three kinds. It is called non-sorrow, non-sorrow and happiness-sorrow. ॥11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)