श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 216: स्वप्न और सुषुप्ति-अवस्थामें मनकी स्थिति तथा गुणातीत ब्रह्मकी प्राप्तिका उपाय  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.216.15 
लिप्सेत मनसा यश्च संकल्पादैश्वरं गुणम्।
आत्मप्रसादं तं विद्यात् सर्वा ह्यात्मनि देवता:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
जो योगी अपने मन और संकल्प के द्वारा दिव्य गुणों को प्राप्त करना चाहता है, उसे आत्मा का आशीर्वाद प्राप्त होता है, क्योंकि सभी देवता आत्मा में स्थित हैं ॥15॥
 
A yogi who wishes to attain the divine qualities through his mind and resolve, receives the blessings of the soul because all the gods are situated in the soul. ॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)