श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 215: आसक्ति छोड़कर सनातन ब्रह्मकी प्राप्तिके लिये प्रयत्न करनेका उपदेश  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.215.22 
कणकुल्माषपिण्याकशाकयावकसक्तव:।
तथा मूलफलं भैक्ष्यं पर्यायेणोपयोजयेत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
अन्न, उड़द, तिल की खली, शाक, जौ का दलिया, सत्तू, मूल और फल, जो भी भिक्षा में प्राप्त हो, उसी अन्न से योगी को अपना जीवन निर्वाह करना चाहिए ॥22॥
 
Grains, black gram, sesame cake, vegetables, barley porridge, sattu, roots and fruits, whatever is obtained in alms, a yogi should sustain his life with that food respectively. ॥22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)