Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.214.7: ब्रह्मचर्य नामक इस गुण को शास्त्रों में ब्रह्मस्वरूप बताया गया है। यह सभी धर्मों से श्रेष्ठ है। ब्रह्मचर्य का पालन करके मनुष्य परम गति को प्राप्त होते हैं। ॥7॥ | mahabharat अध्याय 12.214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्मचर्य नामक इस गुण को शास्त्रों में ब्रह्मस्वरूप बताया गया है। यह सभी धर्मों से श्रेष्ठ है। ब्रह्मचर्य का पालन करके मनुष्य परम गति को प्राप्त होते हैं। ॥7॥
This virtue called celibacy is described in the scriptures as the form of Brahman. It is superior to all religions. By following celibacy, men achieve the highest state. ॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥