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mahabharat 12.214.14: इस प्रकार बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह अपने अन्तःकरण में उत्पन्न हुई पापमयी विषय-वासनाओं को बुद्धिमानी और संयमित मन से जला डाले॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.214.14 
पाप्मानं निर्दहेदेवमन्तर्भूतरजोमयम्।
ज्ञानयुक्तेन मनसा संततेन विचक्षण:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह अपने अन्तःकरण में उत्पन्न हुई पापमयी विषय-वासनाओं को बुद्धिमानी और संयमित मन से जला डाले॥14॥
 
In this way, a wise man should burn away the sinful sexual desires that have appeared in his conscience with a wise and restrained mind. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)