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mahabharat 12.214.1: भीष्मजी कहते हैं - राजन ! अब मैं तुम्हें शास्त्रविधि से मोक्ष प्राप्ति का उचित उपाय बताता हूँ। शास्त्रविधि से कर्मकाण्ड करके निष्काम भाव से मनुष्य तत्वज्ञान द्वारा परम गति को प्राप्त होता है। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 214: ब्रह्मचर्य तथा वैराग्यसे मुक्ति  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.214.1 
भीष्म उवाच
अत्रोपायं प्रवक्ष्यामि यथावच्छास्त्रचक्षुषा।
तत्त्वज्ञानाच्चरन् राजन् प्राप्नुयात्परमां गतिम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! अब मैं तुम्हें शास्त्रविधि से मोक्ष प्राप्ति का उचित उपाय बताता हूँ। शास्त्रविधि से कर्मकाण्ड करके निष्काम भाव से मनुष्य तत्वज्ञान द्वारा परम गति को प्राप्त होता है। 1॥
 
Bhishmaji says – King! Now let me tell you the correct solution for salvation from the scriptures. By performing the rituals prescribed in the scriptures selflessly, a person attains the ultimate goal through the knowledge of philosophy. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)