Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.211.7: इन कारणों से युक्त होकर जीव कर्मों का संचय करता है। कर्मों से कामनाएँ उत्पन्न होती हैं और कामनाएँ पुनः कर्मों को जन्म देती हैं। इस प्रकार यह अनादि, अनंत और महान संसार-चक्र चलता रहता है॥ 7॥ | mahabharat अध्याय 12.211: संसारचक्र और जीवात्माकी स्थितिका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन कारणों से युक्त होकर जीव कर्मों का संचय करता है। कर्मों से कामनाएँ उत्पन्न होती हैं और कामनाएँ पुनः कर्मों को जन्म देती हैं। इस प्रकार यह अनादि, अनंत और महान संसार-चक्र चलता रहता है॥ 7॥
Being connected with these causes, the living being accumulates karmas. Karmas give rise to desires and desires again give rise to karmas. In this manner, this eternal, infinite and great world-cycle keeps moving.॥ 7॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥