Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.210.8: गुरु ने कहा, "बेटा! सुनो। महाराज! तुमने जो बात पूछी है, वह वेदों का सबसे बड़ा और गहनतम रहस्य है। यही आध्यात्मिक सार है और यही समस्त विद्याओं और शास्त्रों का सार है।"   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.210.8 
गुरुरुवाच
शृणु शिष्य महाप्राज्ञ ब्रह्मगुह्यमिदं परम्।
अध्यात्मं सर्वविद्यानामागमानां च यद्वसु॥ ८॥
 
 
अनुवाद
गुरु ने कहा, "बेटा! सुनो। महाराज! तुमने जो बात पूछी है, वह वेदों का सबसे बड़ा और गहनतम रहस्य है। यही आध्यात्मिक सार है और यही समस्त विद्याओं और शास्त्रों का सार है।"
 
The Guru said, "Son! Listen. Sir! The thing you have asked is the greatest and deepest secret of the Vedas. This is the spiritual essence and this is the essence of all the sciences and scriptures. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)