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mahabharat 12.210.6: हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! पृथ्वी आदि सभी महाभूत (तत्व) सर्वत्र एक समान हैं; सभी प्राणियों के शरीर उन्हीं से बने हैं। फिर उनमें क्षय और वृद्धि का विपरीत प्रभाव क्यों होता है?॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.6 
कथं च सर्वभूतेषु समेषु द्विजसत्तम।
सम्यग्वृत्ता निवर्तन्ते विपरीता: क्षयोदया:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे ब्राह्मणश्रेष्ठ! पृथ्वी आदि सभी महाभूत (तत्व) सर्वत्र एक समान हैं; सभी प्राणियों के शरीर उन्हीं से बने हैं। फिर उनमें क्षय और वृद्धि का विपरीत प्रभाव क्यों होता है?॥6॥
 
'O best of Brahmins! All the Mahabhutas (elements) like earth etc. are the same everywhere; the bodies of all living beings are made up of them. Then why do they have opposite effects of decay and growth?॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)