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mahabharat 12.210.43: जैसे नदियों में जल और सूर्य में किरणें होती हैं, और जल तथा किरणें नदियों और सूर्य के साथ उनके नित्य संबंध के कारण चलती हैं, वैसे ही देहधारियों के सूक्ष्म शरीर भी आत्मा के साथ रहते हैं और उसे अपने साथ लेकर आते-जाते हैं ॥ 43॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.43 
नदीष्वापो यथा युक्ता यथा सूर्ये मरीचय:।
संततत्वाद् यथा यान्ति तथा देहा: शरीरिणाम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जैसे नदियों में जल और सूर्य में किरणें होती हैं, और जल तथा किरणें नदियों और सूर्य के साथ उनके नित्य संबंध के कारण चलती हैं, वैसे ही देहधारियों के सूक्ष्म शरीर भी आत्मा के साथ रहते हैं और उसे अपने साथ लेकर आते-जाते हैं ॥ 43॥
 
Just as there is water in rivers and rays in the sun, and the water and rays go along with the rivers and the sun due to their eternal association, similarly the subtle bodies of embodied beings also stay with the soul and come and go taking it along with them. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)