Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.210.40: वही श्रोत्रेन्द्रिय द्वारा बोधगम्य शब्द का बोध कराता है। तात्पर्य यह है कि वही इन्द्रियों और नेत्रों द्वारा सुनता और देखता है। यह शरीर ही उसके लिए शब्द आदि इन्द्रियों का बोध कराने का साधन है। वही आत्मा समस्त कर्मों का कर्ता है॥40॥ | mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रोत्रं वेदयते वेद्यं स शृणोति स पश्यति।
कारणं तस्य देहोऽयं स कर्ता सर्वकर्मणाम्॥ ४०॥
अनुवाद
वही श्रोत्रेन्द्रिय द्वारा बोधगम्य शब्द का बोध कराता है। तात्पर्य यह है कि वही इन्द्रियों और नेत्रों द्वारा सुनता और देखता है। यह शरीर ही उसके लिए शब्द आदि इन्द्रियों का बोध कराने का साधन है। वही आत्मा समस्त कर्मों का कर्ता है॥40॥
He alone makes the sense of the perceptible sound to the sense of hearing. The meaning is that he alone hears and sees through the senses and eyes. This body is the means for him to experience the senses of sound and other things. That soul alone is the doer of all the actions.॥ 40॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥