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mahabharat 12.210.38: वह पुरुष मृत्यु से रहित, सर्वव्यापी, समस्त स्थूल और सूक्ष्म भूतों का प्रेरणास्रोत, सर्वज्ञता आदि गुणों से युक्त तथा समस्त सूक्ष्म और सम्पूर्ण भूतों और उनके गुणों का आश्रय है ॥38॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.38 
अजर: सोऽमरश्चैव व्यक्ताव्यक्तोपदेशवान्।
व्यापक: सगुण: सूक्ष्म: सर्वभूतगुणाश्रय:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वह पुरुष मृत्यु से रहित, सर्वव्यापी, समस्त स्थूल और सूक्ष्म भूतों का प्रेरणास्रोत, सर्वज्ञता आदि गुणों से युक्त तथा समस्त सूक्ष्म और सम्पूर्ण भूतों और उनके गुणों का आश्रय है ॥38॥
 
That man is free from death, omnipresent, the inspiration of all the gross and subtle elements, possessing the qualities of omniscience etc., and is the shelter of all the subtle and complete beings and their qualities. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)