Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.210.35: मन को महातत्त्व का कार्य कहा गया है और महातत्त्व को अव्यक्त प्रकृति का कार्य कहा गया है। अतः बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह सब प्राणियों के आत्मा परमात्मा को सब प्राणियों में विद्यमान जान ले। 35॥ | mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मन को महातत्त्व का कार्य कहा गया है और महातत्त्व को अव्यक्त प्रकृति का कार्य कहा गया है। अतः बुद्धिमान पुरुष को चाहिए कि वह सब प्राणियों के आत्मा परमात्मा को सब प्राणियों में विद्यमान जान ले। 35॥
Mind is said to be the work of Mahatattva and Mahatattva is said to be the work of unmanifested nature. Therefore, an intelligent man should know that God, the soul of all beings, is present in all living beings. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥