Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.210.34: जिह्वा जल का कार्य है, घ्राणेन्द्रिय पृथ्वी का कार्य है, श्रवणेन्द्रिय आकाश का कार्य है और नेत्रेन्द्रिय अग्नि का कार्य है तथा समस्त प्राणियों में त्वचा को सदैव वायु का कार्य समझना चाहिए ॥34॥ | mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जिह्वा जल का कार्य है, घ्राणेन्द्रिय पृथ्वी का कार्य है, श्रवणेन्द्रिय आकाश का कार्य है और नेत्रेन्द्रिय अग्नि का कार्य है तथा समस्त प्राणियों में त्वचा को सदैव वायु का कार्य समझना चाहिए ॥34॥
The tongue is the function of water, the sense of smell is the function of earth, the sense of hearing is the function of sky and the sense of eyes is the function of fire and among all the living beings, the organ of skin should always be considered to be the function of air. 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥