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mahabharat 12.210.15: ये अविनाशी भगवान श्रीकृष्ण ही पितर, देवता, ऋषि, यक्ष, दानव, नाग, राक्षस और मनुष्य आदि के रचयिता हैं॥15॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.15 
पितॄन् देवानृषींश्चैव तथा वै यक्षराक्षसान्।
नागासुरमनुष्यांश्च सृजते परमोऽव्यय:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ये अविनाशी भगवान श्रीकृष्ण ही पितर, देवता, ऋषि, यक्ष, दानव, नाग, राक्षस और मनुष्य आदि के रचयिता हैं॥15॥
 
This immortal God Shri Krishna is the creator of ancestors, gods, sages, yakshas, ​​demons, snakes, demons and humans etc. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)