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mahabharat 12.210.10: वेदवेत्ता लोग उसे सनातन पुरुष और विष्णु भी मानते हैं। वह अव्यक्त और सनातन ब्रह्म है जो जगत् की रचना और संहार करता है। 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.10 
पुरुषं सनातनं विष्णुं यं तं वेदविदो विदु:।
स्वर्गप्रलयकर्तारमव्यक्तं ब्रह्म शाश्वतम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
वेदवेत्ता लोग उसे सनातन पुरुष और विष्णु भी मानते हैं। वह अव्यक्त और सनातन ब्रह्म है जो जगत् की रचना और संहार करता है। 10॥
 
The people of Vedas consider him to be the eternal man and also Vishnu. He is the unmanifested and eternal Brahma who creates and destroys the world. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)