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mahabharat 12.210.1: युधिष्ठिर बोले - हे भरतनंदन, वक्ताओं में श्रेष्ठ! आप मुझे मोक्ष का साधन करने वाले परम योग का उपदेश दीजिए। मैं उन्हें यथार्थ रूप से जानना चाहता हूँ। 1॥   |   mahabharat अध्याय 12.210: गुरु-शिष्यके संवादका उल्लेख करते हुए श्रीकृष्ण-सम्बन्धी अध्यात्मतत्त्वका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.210.1 
युधिष्ठिर उवाच
योगं मे परमं तात मोक्षस्य वद भारत।
तमहं तत्त्वतो ज्ञातुमिच्छामि वदतां वर॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे भरतनंदन, वक्ताओं में श्रेष्ठ! आप मुझे मोक्ष का साधन करने वाले परम योग का उपदेश दीजिए। मैं उन्हें यथार्थ रूप से जानना चाहता हूँ। 1॥
 
Yudhishthir said – Tat Bharatanandan is the best among speakers! Please teach me the supreme yoga which is the means of salvation. I want to know him truly. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)