आत्मनाऽऽत्मनि संयोज्य परमात्मन्यनुस्मरेत्॥
ततो बुद्धे: परं बुद्ध्वा लभते न पुनर्भवम्।
मरणे समनुप्राप्ते यश्चैवं मामनुस्मरेत्॥
अपि पापसमाचार: स याति परमां गतिम्।
अनुवाद
मनुष्य को चाहिए कि वह अपना ध्यान भगवान में लगाए और उनका निरंतर स्मरण करे, तत्पश्चात बुद्धि से परे भगवान को जान लेने पर मनुष्य पुनः इस संसार में जन्म नहीं लेता। जो मनुष्य मृत्यु के समय इस प्रकार मेरा स्मरण करता है, वह चाहे पहले पापी ही क्यों न रहा हो, परम गति को प्राप्त होता है।
One should concentrate oneself on God and remember Him continuously, after that, after knowing God beyond the intellect, man does not take birth in this world again. The person who remembers me in this way at the time of death, even if he was previously a sinner, attains the supreme state.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥