श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 25-26h
 
 
श्लोक  12.208.25-26h 
इत्येतत् सर्वदेवानां चातुर्वर्ण्यं प्रकीर्तितम्।
एतान् वै प्रातरुत्थाय देवान् यस्तु प्रकीर्तयेत्॥ २५॥
स्वजादन्यकृताच्चैव सर्वपापात् प्रमुच्यते।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार सभी देवताओं के चार वर्ण बताए गए हैं। जो मनुष्य प्रातःकाल उठकर इन देवताओं का गुणगान करता है, वह अपने द्वारा किए गए तथा परसंग से प्राप्त हुए समस्त पापों से मुक्त हो जाता है।॥25 1/2॥
 
In this manner, the four classes of all the gods have been described. One who wakes up in the morning and sings the praises of these gods is freed from all the sins committed by himself and those received through the company of others.॥ 25 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)