श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 208: ब्रह्माके पुत्र मरीचि आदि प्रजापतियोंके वंशका तथा प्रत्येक दिशामें निवास करनेवाले महर्षियोंका वर्णन  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  12.208.15-16 
भगोंऽशश्चार्यमा चैव मित्रोऽथ वरुणस्तथा।
सविता चैव धाता च विवस्वांश्च महाबल:॥ १५॥
त्वष्टा पूषा तथैवेन्द्रो द्वादशो विष्णुरुच्यते।
इत्येते द्वादशादित्या: कश्यपस्यात्मसम्भवा:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
भग, अंश, अर्यमा, मित्र, वरुण, सविता, धाता, महाबली विवस्वान, त्वष्टा, पूषा, इंद्र और बारहवें विष्णु कहे गए हैं। ये बारह आदित्य हैं, जो कश्यप और अदिति के पुत्र हैं। 15-16॥
 
Bhaga, Ansh, Aryama, Mitra, Varun, Savita, Dhata, Mahabali Vivasvan, Tvashta, Pusha, Indra and the twelfth Vishnu are said to be. These are the twelve Adityas, who are the sons of Kashyap and Aditi. 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)