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mahabharat 12.207.d1: हे सबका आदर करने वाले राजा! महादेव भगवान देवकीनंदन श्रीकृष्ण तपस्वरूप हैं। उनकी कृपा से तुम्हारे सभी दुःख नष्ट हो जाएँगे। जगत के एकमात्र रचयिता श्रीकृष्ण ही ज्ञानियों के परम धाम हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक d1
 
 
श्लोक  12.207.d1 
(तप: स्वरूपो महादेव: कृष्णो देवकिनन्दन:।
तस्य प्रसादाद् दु:खस्य नाशं प्राप्स्यसि मानद॥
एक: कर्ता स कृष्णश्च ज्ञानिनां परमा गति:।
 
 
अनुवाद
हे सबका आदर करने वाले राजा! महादेव भगवान देवकीनंदन श्रीकृष्ण तपस्वरूप हैं। उनकी कृपा से तुम्हारे सभी दुःख नष्ट हो जाएँगे। जगत के एकमात्र रचयिता श्रीकृष्ण ही ज्ञानियों के परम धाम हैं।
 
The king who respects everyone! The great deity Lord Devkinandan Shri Krishna is in the form of penance. By His grace all your sorrows will be destroyed. The only creator of the world, Shri Krishna is the ultimate destination of the wise.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)