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mahabharat 12.207.43-44h: हे पुत्र! अब मैं उत्तर भारत में उत्पन्न म्लेच्छों का वर्णन करूँगा; ये यौवन, कम्बोज, गांधार, किरात और बर्बर हैं; ये सभी पापी हैं और सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 207: श्रीकृष्णसे सम्पूर्ण भूतोंकी उत्पत्तिका तथा उनकी महिमाका कथन  »  श्लोक 43-44h
 
 
श्लोक  12.207.43-44h 
उत्तरापथजन्मान: कीर्तयिष्यामि तानपि।
यौनकाम्बोजगान्धारा: किराता बर्बरै: सह॥ ४३॥
एते पापकृतस्तात चरन्ति पृथिवीमिमाम्।
 
 
अनुवाद
हे पुत्र! अब मैं उत्तर भारत में उत्पन्न म्लेच्छों का वर्णन करूँगा; ये यौवन, कम्बोज, गांधार, किरात और बर्बर हैं; ये सभी पापी हैं और सम्पूर्ण पृथ्वी पर विचरण करते हैं।
 
O dear son, I shall now describe the mlechha (Indians) born in northern India; the Yauns, Kambojas, Gandharas, Kiratas and Barbars - all of them are sinners and roam around the whole earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)